
अब नही मिलते जहाँ में ,
लोग कुछ सुलझे हुए
जिस तरफ़ देखो जहाँ भी ,
हैं सभी उलझे हुए
अपने ग़म हैं , अपनी खुशी है ,
अपने अफसाने हुए ,
कुछ भरी महफिल में ,
अपनों में भी बेगाने हुए
है यहाँ किसको ख़बर अब ,
सब तो परवाने हुए
देख " अंजुम " इस जहाँ में ,
कैसे कैसे अफसाने हुए ?
पीते हैं यहाँ लोग पर ,
बदनाम मयखाने हुए
- कुलदीप अन्जुम
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