
वह पूछ रहे हैं हाले - दिल ,
हम अपना दर्द सुनाएँ क्या ?
जब ख़ुद हमको ही ख़बर नही ,
तो औरों को बतलाएं क्या ?
हर धड़कन ही किस्सा कहती हैं ,
दुनिया से आज छुपायें क्या ?
जब अपने ही न साथ चले ,
तो गैरों को आजमायें क्या ?
मुझको ख़ुद से ही इश्क नही ,
तो औरों पर फरमाएं क्या ?
जो टूट गया था बनते ही ,
हम वह अफसाना गायें क्या ?
जब पत्थर दिल हैं लोग यहाँ ,
तो दर्दे - जिगर सुनाएँ क्या ?
हर बस्ती में बदनाम हुए ,
अब "अंजुम " आंख चुराएँ क्या ?
- कुलदीप अन्जुम
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